Stock:

यदि बहुत सारा  सामान किसी  कंपनी के द्वारा बेचने के उद्देश्य से रखा गया है, स्टॉक कहा जाता है |

 Types of Stock:

स्टोक्स दो प्रकार के होते हैं :
  1. ओपनिंग स्टॉक : ओपनिंग स्टॉक वो  स्टॉक होता जो एक अप्रैल को हो यानि साल शुरू होते वक्त जो भी सामान अपने पास होता है, ओपनिंग स्टॉक के अंतर्गत आता है |
  2. क्लोसिंग स्टॉक : साल के खतम होते वक्त जो स्टॉक अपने पास बचा होता है क्लोसिंग स्टॉक के अंतर्गत आता है |

Trade Receivable:

जब आप सामान बेचते हैं और उससे मिलाने वाले पैसे को trade receivable कहा जाता है | इसे भागो में वर्गीकरण किया गया है |
  1. Debtor: ये वो व्यक्ति होता है जिसे उधार में सामान बेचीं जाती है 
  2. bill receivable: debtor के द्वारा दिया गया लैटर जिसमे उधार की चुकता करने का व्यवरा होता है उसे ही बिल रिसीवएवल कहते हैं |
  3. trade payable: जो सामान ख़रीदा जाता है और उसी के सन्दर्भ में जो पेमेंट किया जाता है उसे ही ट्रेड पेबल कहते हैं |ये दो भागो में वर्गीकरण किया गया है - 
  • creditor: वह व्यक्ति जिससे कंपनी उधार में कोई सामान खरीदती  है वह व्यक्ति creditor होता है | creditor का हिंदी में मतलब होता है लेनदार यानि की वह व्यक्ति सामान के बदले कंपनी से पैसा लेगा तो कंपनी का लेनदार हुआ |
  • bill payable: यह वह लैटर होता है जिसमे यह लिखा होता है कंपनी ने जो सामान उधार में बेचा है उसका पेमेंट कब करना है |

Goods: 

बिजनेश में जो भी परचेज और सेल्स होता है उसे ही गूड्स कहा जाता है |

Cost of goods sold: 

यह वह डायरेक्ट कोस्ट होती है जो प्रोडक्शन होते वक्त goods और services पर लगायी जाती है |

Book value: 

आपने एक जनवरी 2024 को एक लैपटॉप ख़रीदा जिसकी कीमत 40000 थी उस रेट को आपने एक एक बुक पर नोट कर लिया अब अगले ही दिन उसकी कीमत घटकर (30000) हो गयी अब आप क्या करोगे ऐसे स्थिति में 40000 बुक वेल्यु होगी और घटी हुयी कीमत 30000 मार्केट वेल्यु होगी |

Cost:

इसका मतलब होता लागत यानी प्रोडक्ट बनाने में लगे लागत को ही कोस्ट कहते हैं |

Voucher:

voucher एक एविडेंस होता है मतलब की बिजनेश में होने वाले लेन - दें का साक्ष्य जैसे की cash memo या bill या फिर receipt debit/credit notes इत्यादि |

Entry:

इसका मतलब जब किसी अकाउंट के अंदर किसी भी प्रकार की एंट्री की जाती है तो इसे ही एंट्री करना कहा जाता है |

Discount:

डिस्काउंट का मतलब कस्टमर को किसी भी सामान में छूट देना उसे ही डिस्काउंट कहा जाता है जैसे की 500 रुपये की सामान पर 100 discount देने पर सामान की कीमत 400 रुपये हो जाती है | डिस्काउंट दो प्रकार का होता है 
  1. trade discount : यह डिस्काउंट तब दिया जाता है जब आप उधार में ज्यादा  सामान खरीद रहे हों इसे ही ट्रेड डिस्काउंट कहा जाता है | 
  2. cash discount : यह डिस्काउंट तब दिया जाता है जब आप कम सामान खरीद रहे हो और उसका पेमेंट भी उसी समय कर रहे हो तो उस समय दिया जाने वाला डिस्काउंट कैश डिस्काउंट कहलाता है |

Proprietor:

ये owner होते हैं यानी की मालिक |

Depreciation:

डेपरीशिएशन किसी असेट के वेल्यू (अमाउंट) में जीतनी गिरावट होगी उसी को देपरिशिएशन कहते हैं |

Bad debt:

 bad debt  किसी कंपनी या व्यक्ति को किया गया ट्रांजेक्शन होता जो की संदेह में होता है की मिलेगा या नही तो ऐसे स्थिति में वह कंपनी या व्यक्ति bad debt माना जाता है |

Insolvent:

यह वह व्यकि या एंटरप्रायजेज होता है जो अपने खर्चो को डे नहीं सकते उन्हें ही insolvent  कहा जाता है |

Solvent:

जो व्यक्ति या कंपनी अपने खर्चो को डे सकते है उन्हें solvent कहा जाता है |

Balance sheet:

इसके अंदर एक अप्रैल से लेकर 31 मार्च तक जितने भी ट्रांजेक्शन किये गए होते हैं उनके समरी होती होती है |
की आपने कहाँ कितना खर्चा किया कहाँ कितना प्राफिट कमाया इत्यादि |